तत्वो का आवर्ती वर्गीकरण | पाठ-2 | विज्ञान-1 | कक्षा-10th

0
110

 आज हम तत्वों का वर्गीकरण इस पाठके महत्त्वपूर्ण मुद्दो के बरे मी जानकारी प्राप्त करेगे |

 

1)तत्वों का वर्गीकरण:

a)आज की तारीख में विज्ञान जगत को कुल 118 तत्वों की जानकारी प्राप्त हुई है।

 

b)इसवी सन 1800 साल के आसपास केवल 30 ही तत्व की खोज की जा चुकी थी।

 

c)प्रारंभ में वर्गीकरण के अनुसार तत्वों को धातु तथा अधातु ऐसे दो भागों में विभाजित किया गया।

d)कालांतर में तत्व का धातु सदृश नामक एक और प्रकार ध्यान में आया।

 

2)डोबेरेनर के त्रिक:

इन्होंने ने समान गुणधर्म  वाले प्रत्येक तीन -तीन तत्वों के समूह बनाकर उन्हें त्रिक नाम दिया।

इस नियम के अनुसार तीन तत्वों को उनके परमाणु द्रव्यमान के आरोही क्रम में इस प्रकार व्यवस्थित किया गया कि मध्य तत्व का परमाणु द्रव्यमान उस त्रिक के अन्य दो तत्व के परमाणु द्रव्यमान के लगभग औसत के बराबर होता है।

उदाहरण-

 Li, Na, K

Cl,Br,I

 

3)न्यूलैंड का अष्टक का नियम:

इनके समय में कुल 56 तत्व की खोज की जा चुकी थी।न्यूलैंड ने उस समय ज्ञात सभी तत्वों को उनके परमाणु द्रव्यमान के आरोही क्रम में रखा। उन्होंने पाया कि प्रत्येक आठवें तत्व का गुणधर्म यह पहले तत्व के गुणधर्म के समान होता है

उदाहरण-

सोडियम और लिथियम

फ्लोरीन और क्लोरीन

मैग्नीशियम और बेरिलियम

 

4)न्यूलैंड अष्टक के  नियम की त्रुटियां:

a)यह नियम केवल कैल्शियम तत्व तक ही लागू होता है।

 

b)न्यूलैंड ने कुछ जगहों पर दो-दो तत्वों को रखा।

CO तथा Ni

Ce तथा Li

 

c)कालांतर में खोजे गए नए तत्व के गुणधर्म न्यूलैंड के अष्टक में लागू नहीं होते है।

 

5)मेंडलीफ की आवर्त सारणी:

a)इनके समय में कुल 63 तत्वों की खोज की जा चुकी थी।

 

b)इन्होंने तत्वों के परमाणु द्रव्यमान को आरोही क्रम(बढ़ते क्रम) में रखा।

 

c)इस नियम के अनुसार तत्वों के भौतिक तथा रासायनिक गुणधर्न उनके परमाणु द्रव्यमान के आवर्त फलन होते हैं।

 

6)मेंडलीफ की आवर्त सारणी की विशेषताएं:

 

a)आवर्त सारणी में गुण धर्म के अनुसार योग्य स्थान देते बने इसीलिए कुछ तत्वों के परमाणु द्रव्यमान पुनः जांच कर दुरुस्त किए गए

 

उदाहरण -बेरिलियम का पहले निश्चित किया गया परमाणु द्रव्यमान 14.09 बदलकर 9.4 ऐसा किया गया । तथा बेरिलियम को बोरान के पहले स्थान दिया गया।

 

b)निष्क्रिय तत्व या शून्य समूह के तत्वों को एक उचित स्थान दिया गया।

 

c)आवर्त सारणी में मेंडलीफ ने उस समय तक न खोजे गए तत्वों के लिए कुछ स्थान रिक्त रखे उनमें से तीन अज्ञात तत्वों को नजदीक के ज्ञात तत्वों के आधार पर एका बोरान, एका एलुमिनियम तथा एका सिलिकॉन ऐसे नाम दिया। जिनके परमाणु द्रव्यमान क्रमशः 44,68 और 72 थे।

 

7)आवर्त सारणी की विषमताएं:

a)मेंडलीफ की सारणी में समस्थानिकको किस प्रकार रखा जाए यह एक बड़ी चुनौती थी।

 

b)हाइड्रोजन का स्थान क्षारीय धातु के समूह (समूह l) मैं या हैलोजन (समूह VII) इन समूह में इस सारणी में निश्चित नहीं हो पाया।

 

c)कोबाल्ट तथा निकेल इन तत्वों के पूर्णांक में परमाणु द्रव्यमान समान होने के कारण इनके स्थान के विषय में मेंडलीफ की आवर्त सारणी में संदिग्धता थी |

 

8)आधुनिक आवर्त सारणी का नियम:

a)हेनरी मोसले नामक वैज्ञानिक ने यह सिद्ध किया कि तत्व का परमाणु क्रमांक तत्व के परमाणु द्रव्यमान की अपेक्षा प्रभावी मूलभूत गुण धर्म है।

 

b)उन्होंने बताया कि तत्व का परमाणु क्रमांक अर्थात उस परमाणु के परमाणु केंद्रक में स्थित धन आवेशित कण अथवा प्रोटॉनो की संख्या है।

c)हेनरी मोसले के अनुर तत्व के गुणधर्म उनके परमाणु  क्रमांकों के आवर्त फलन होते हैं।

 

9)आधुनिक आवर्त सारणी की रचना:

 

a)आधुनिकआवर्त सारणी में कुल मिलाकर सात (7)क्षैतिज पंक्तियां होती है ,उन्हें आवर्त कहते हैं। जिन्हे 1से 7 क्रमांक दिए गए हैं।

 

b)आवर्त में 18 ऊर्ध्वाधर स्तंभ हैं उन्हें समूह कहते हैं जिन्हें 1 से 18 क्रमांक दिए गए हैं।

 

c)7 क्षैतिज पंक्तियों के अलावा दो और पंक्तियां स्वतंत्र रूप से आवर्त सारणी के अधोभाग में दर्शाई गई है।जिसे लैंथेनाइड श्रेणी तथा एक्टी नायीड श्रेणी कहते हैं।

 

d)संपूर्ण श्रेणी को एस -खंड(S-block) ,पी -खंड P-block),डी -खंड(S-block)  एफ -खंड (f- block)इस प्रकार चार खंडों में वर्गीकृत किया गया हैl

 

e)समूह 1 तथा समूह 2 से एस- खंड तैयार होता हैl समूह 13 से समूह 18 तक पी- खंड में समाविष्ट होते हैंl

 

f)समूह 3 से समूह 12तक डी- खंड में समाविष्ट होते हैंl

 

g)लैंथेनाइड तथा एक्टिनायिड एफ -खंड में समाविष्ट होते है ।

 

h)डी- खंड(d-Block) के तत्त्वों को संक्रमण तत्व भी कहते हैं।

 

i)आधुनिक आवर्त सारणी में टेढ़ी-मेढ़ी रेखा के किनारे धातु सदृश  तत्व होते हैं। टेढ़ी-मेढ़ी रेखा के बाई और सभी धातु होकर दाहिनी और सभी और अधातु है।

 

10)समूह तथा इलेक्ट्रॉन संरूपण:

किसी समूह के आखिरी कक्षा में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है। समूह में जैसे-जैसे हम ऊपर से नीचे की तरफ जाते हैं वैसे वैसे नई कक्षाएं   जुड़ती जाती है।

11)आवर्त तथा इलेक्ट्रॉनिक संरूपण:

आवर्त में बाएं से दाहिने ओर जाते समय परमाणु क्रमांक में एक की वृद्धि होती है अर्थात नाभि में एक प्रोटोन या धन आवेश की संख्या बढ़ जाती है।

 

12)आधुनिक आवर्त सारणी में आवर्त झुकाव:

आधुनिक आवर्त सारणी में किसी आवर्त या किसी समूह के तत्वों के गुण-धर्मों की तुलना करने पर उनके गुण धर्म में कुछ नियमितता दिखाई देती है इसे ही आधुनिक आवर्त सारणी का झुकाव कहते हैं।

 

13)परमाणु आकार (Atomic size):

 

आवर्त में बाएं से दाहिने और जाने पर परमाणु त्रिज्या में कमी होती जाती है। आवर्त में बाएं से दाएं और जाने पर परमाणु क्रमांक एक इकाई से बढ़ जाता है अर्थात नाभिक में एक धन आवेश की वृद्धि हो जाती है। जिसके कारण नाभिक में स्थित धन आवेश तथा अंतिम कक्षा में स्थित इलेक्ट्रॉनों के बीच आकर्षण बढ़ जाता है। और परमाणु का आकार क्रमशः घटते जाता है।

 

समूह में ऊपर से नीचे की ओर जाने पर परमाणु आकार बढ़ता जाता है इसका कारण यह है कि ऊपर से नीचे जाने पर नही कक्षाएं जुड़ती जाती है तथा नाभि में स्थित धन आवेश तथा अंतिम कक्षा में इलेक्ट्रॉनों के बीच का आकर्षण कम पड़ता जाता है। यही कारण है कि परमाणु आकार समूह में ऊपर से नीचे की तरफ जाने पर बढ़ता जाता।

परमाणु आकार परमाणु त्रिज्या पर निर्भर होता है परमाणु त्रिज्या पीको मीटर (pm) में मापी जाती है।

 

14)संयोजकता:

तत्वों के परमाणु के बाहरी कक्षा में पाए जाने वाले इलेक्ट्रॉनों अर्थात संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या पर तत्वों की संयोजकता निश्चित की जाती है।

 

15)धातु तथा अधातु गुणधर्म:

धातु की परमाणु अपनी संयोजकता इलेक्ट्रॉनों को खोकर धनायन बनाते हैं इसे ही परमाणु की विद्युत धनात्मकता कहते हैं। इसी प्रकार अधातुओं के परमाणु अपने बाहरी कक्षा के संयोजकता कवच में इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके  ऋणायन बनाते हैं।

किसी भी समूह के ऊपर से नीचे की ओर जाने पर तत्वों की विद्युत धनता (धनात्मकता) बढ़ती जाती है तो विद्युत ऋणता (ऋणत्मकता )कम होती जाती है।

किसी भी आवर्त में बाएं से दाहिने ओर जाने पर तत्वों की विद्युत ऋणता बढ़ती जाती है और विद्युत धनता क्रमशः कम होती जाती है। तत्वों की विद्युत धनता अथवा विद्युत ऋणता ज जितनी ज्यादा होती है उसकी अभिक्रियाशिलता उतनी ही ज्यादा होती है।


16)हैलोजन वंश की श्रेणी बद्धता:

समूह 17 में हैलोजन कुल के सदस्य हैं। समूह में ऊपर से नीचे की ओर जाने पर उन की भौतिक अवस्था में श्रेणी बद्धता दिखाई देती है।

फ्लोरीन और क्लोरीन एक गैस है।

ब्रोमीन यह द्रव है।

आयोडीन यह ठोस है।

 

ध्यान रखे

कवच n(कक्षा संख्या) इलेक्ट्रोन धारण क्षमता
K 1 2
L 2 8
M 3 18
N 4 32

 

 

CLICK FOR PRACTICE PAPER DOWNLOAD(download)

 

इसे भी पढे:

गुरूत्वाकर्षण(download)

 आनुवांशिकता तथा उत्क्रांती(download)

रासायनिक अभिक्रिया और समीकरण(download)

 

 



 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here