करवा चौथ व्रत कथा | karava chauth

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      आज हम करवा चौथ व्रत से जुड़ी पूजा -विधि और व्रत मनाने के पीछे की कहानी के बारे मेँ जानकारी प्राप्त करेगे|

1) प्रस्तावना

अन्य त्योहारों की तरह करवा चौथ व्रत का त्योहार हिंदुओं के एक प्रमुख त्योहारों में गिना जाता है। यह त्योहार विशेष रूप से स्त्रियों का एक प्रमुख त्योहार माना जाता है। करवा चौथ का व्रत अक्सर सुहागन स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु और उत्तम स्वास्थ्य के लिए रखती है। यह त्योहार भारत के मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश हरियाणा ,पंजाब, गुजरात इत्यादि प्रांतों में विशेष रूप से मनाया जाता है। इस त्योहार की खास बात यह है कि इस त्योहार के दिन स्त्रियां पूरे दिन निर्जला व्रत रखती है तथा रात को चंद्रमा के दर्शन के बाद इस व्रत को तोडती है। इस दिन विशेष रुप से गणेश जी, शिव पार्वती, करवा माता,कार्तिकेय तथा चंद्रमा की पूजा की जाती है। करवा चौथ में करवा का अर्थ होता है मिट्टी का बरतन तथा चौथ का अर्थ  है चतुर्थी का दिन।

2) पूजा- विधि

इस व्रत में करवा या मिट्टी के बर्तन की विशेष भूमिका मानी जाती है।इस त्योहार में एक पाटे पर जल से भरा हुआ लोटा तथा गेहूं से भरे करवे को रखते हैं। स्त्रियां किसी कागज या दीवार पर भगवान शिव ,कार्तिकेय और चंद्रमा की प्रतिमा बनाकर उन प्रतिमा की पूजा करती है। स्त्रियां पूरे दिन बिना अन्न खाए और बिना पानी पिए इस व्रत को रखती है। रात्रि के समय चंद्रमा का दर्शन तथा उसकी पूजा करने के पश्चात ही स्त्रियां इस व्रत को तोड़ती है। इस व्रत के दौरान चंद्रमा के दर्शन के बाद स्त्रियां चलनी में अपने पति का चेहरा देखती है। पति अपने पत्नी को मिष्ठान खिलाकर पानी पिलाते हैं तथा इस प्रकार स्त्रियां इस व्रत को पूर्ण करती है। इस त्योहार की एक खास बात यह है कि जब कोई स्त्री इस व्रत की शुरुआत करती है तो उसे जीवन भर इस व्रत को करना पड़ता है।

 

3) करवा चौथ व्रत के पीछे की कहानी

 

एक समय की बात है एक गांव में एक साहूकार रहता था। इस साहूकार के सात लड़के और एक बेटी थी। सातो भाई अपनी बहन से बहुत प्यार करते थे। सातो भाई का अपनी बहन के प्रति प्यार इतना ज्यादा था कि जब तक वह अपनी बहन को खाना नहीं खिला ले  तब तक वो  भी भोजन ग्रहण नही करते थे। एक बार की बात है जब बहन अपने ससुराल से मायके में आई थी। शाम के वक्त जब सभी भाई अपने काम- व्यवसाय से घर पर आए तो अपनी बहन को व्याकुल पाकर बहुत ही चिंतित हुए।जब सातों भाई खाना खाने के लिए बैठे तब उन्होंने अपनी बहन से खाना खाने का आग्रह किया । पर बहन ने खाने से इंकार कर दिया और बताया कि आज उसने करवा चौथ का व्रत रखा है। सबसे छोटे भाई से अपनी बहन की हालत नहीं देखी गई। छोटे भाई ने एक पीपल के पेड़ पर जाकर छोटे से दीपक को जला कर रख दिया और ऐसा प्रतीत हुआ कि जैसे कि चांद निकल आया है। इसके बाद छोटे भाई ने अपनी बहन को कहा कि बहन देखो चांद निकल आया है तुम इस चांद को अर्घ्य देकर भोजन घर कर सकती है। उस जलते हुए दीपक को देखकर बहन को सचमुच लगा कि जैसे चांद उग आया हो। बहन ने चांद को देखकर भोजन ग्रहण कर लिया|

 

बहन के भोजन ग्रहण करने के बाद उसके ससुराल से यह खबर आई कि उसके पति की मृत्यु हो चुकी है। बहन अत्यधिक डर गई। उसके भाभी ने सारी सच्चाई से अवगत कराया तथा उसके साथ क्या हुआ यह समझाया। भाभी से सच्चाई सुनने के बाद उस बहन ने निश्चय किया कि वह अपने पति का अंतिम संस्कार नहीं करेगी  तथा वह अपने पति को पुनर्जीवन दिलाकर रहेगी। वह पूरे साल भर अपनी पति के शव के पास बैठी रही। तथा अगले साल आने पर उसने फिर से करवा चौथ का व्रत रखा और अपने पति को पुनर्जीवन दिलाने में सफल रहीं। इस प्रकार करवा चौथ व्रत की पूजा कथा प्रचलित हुई।

 

4)स्त्रियों का शृंगार

 

स्त्रियां सोलह शृंगार करने के साथ-साथ अपने हाथ में मेहंदी लगाती हैं। इस दिन स्त्रियां एक विशेष परिधान को धारण करने के साथ-साथ गहने तथा आभूषण भी पहनती है। हर प्रकार की साज-सज्जा करने के पश्चात स्त्रियों की सुंदरता में चार चांद लग जाते हैं।


5) व्रत उद्यापन विधि

 

उद्यापन विधि के लिए सर्वप्रथम महिलाओं को घर में हलवा और पूरी जैसे सामग्री बनानी पड़ती है। तत्पश्चात इन पूरियों को 4-4 का समूह एक थाली में तेरह जगह रखते हैं। इसके बाद इन पूरियों के ऊपर हलवा रखा जाता है साथ ही साथ इसके ऊपर साड़ी- ब्लाउज और अपनी इच्छा अनुसार कुछ रुपए भी रखे दिए जाते है । थाली में रखी गई सामग्री के आसपास कुमकुम तथा चावल लगा देते हैं। थाली में रखी गई सभी सामग्री अपनी सासू मां के चरण स्पर्श करके उन्हें दे दी  जाती है। तत्पश्चात तेरह ब्राह्मणों को भोजन करा कर उन्हें दक्षिणा देकर विदा किया जाता है। इस प्रकार करवा चौथ व्रत की उद्यापन विधि पूर्ण की जाती है।

 

6)निष्कर्ष

 

कुल मिलाकर देखा जाए तो यह त्योहार  पति की उत्तम स्वास्थ्य के साथ-साथ घर में सुख शांति का माहौल उत्पन्न करने वाला  त्योहार कहा जा सकता है। आजकल तो यह त्योहार पति -दिवस के रूप में भी प्रचलित हो चुका है।

 

ध्यान रखे

करवा चौथ का दिनांक 24 october
पूजा का समय 5:29 से 6:48 तक(शाम को)
चाँद निकलने का समय 8:16 मिनट
कौन से देवी देवता पूजे जाते है? भगवान गणेश,भगवान शिव,माता पार्वती,भगवान कार्तिक
पूजा करने का उद्देश्य पति के लंबी आयु के साथ-साथ उत्तम स्वास्थ्य हेतू

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